न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर
जब रक्षक ही मौन हो जाएं और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते चप्पलें घिस जाएं, तो आखिरी उम्मीद ‘जनता का दरबार’ ही बचता है। शुक्रवार को जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर के समक्ष मुंगेर की जनता ने व्यवस्था की जो तस्वीर पेश की, वह प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
जनता का फरियाद सुनते मुंगेर के डीएम
“साहब! मेरा बेटा ढूंढ दो” – एक मां की बेबसी
जनता दरबार में सबसे हृदयविदारक मामला शिवगंज दरियापुर की सूर्यंका कुमारी का रहा। एक बेबस मां ने जिलाधिकारी के सामने रोते हुए कहा, “साहब! पड़ोसी ने मेरे बेटे का शादी की नीयत से अपहरण कर लिया है। चार महीने से थाने की धूल फांक रही हूं, लेकिन पुलिस ने अब तक कोई खोजबीन नहीं की।” पुलिस की इस घोर संवेदनहीनता और सुस्ती पर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित थाना को तत्काल जांच कर कड़ी कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया है।
जनता का फरियाद सुनते मुंगेर के डीएम
रेलवे की मनमानी और राजस्व विभाग का भ्रष्टाचार
सिर्फ अपराध ही नहीं, बल्कि आम जनता विभागीय तानाशाही से भी त्रस्त दिखी:
रास्ते की जंग: जमालपुर के गांधी टोला (रामपुर) के ग्रामीणों ने रेलवे पर उनका पारंपरिक रास्ता अवरुद्ध करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने साफ कहा कि उनके आवागमन के अधिकार को कुचला जा रहा है।
भ्रष्टाचार की गूँज: बासुदेवपुर के प्रेमनंदन प्रसाद ने सदर अंचलाधिकारी (CO) पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनके परिमार्जन आवेदन को बार-बार बिना ठोस कारण के रिजेक्ट किया जा रहा है।
भू-माफिया का खौफ: हेरूदियारा के अभय मंडल ने दबंगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत कर सुरक्षा की गुहार लगाई।
सिस्टम की लाचारी: मौत के बाद भी प्रमाण पत्र का इंतजार
हवेली खड़गपुर के किशोरी राय की शिकायत ने सरकारी बाबूगिरी की पोल खोल दी। पत्नी की मृत्यु के छह माह बीत जाने के बाद भी उन्हें एक अदद मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए सिस्टम से लड़ना पड़ रहा है। वहीं, एक सेवानिवृत कर्मचारी रामदेव मंडल को अपने ही हक (ACP/MACP) के लिए बुढ़ापे में दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
जनता का फरियाद सुनते मुंगेर के डीएम
जिलाधिकारी का सख्त एक्शन
कुल 25 फरियादियों की शिकायतों को सुनते हुए जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने कई मामलों में ‘ऑन द स्पॉट’ अधिकारियों को फोन लगाकर फटकार लगाई और शिकायतों के त्वरित निष्पादन का आदेश दिया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनहित के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सवाल यह है कि क्या जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद जिले के थाना प्रभारी और राजस्व अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेंगे?



