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मुंगेर में आत्मनिर्भरता की नई पहल: 1756 निर्माण श्रमिकों को मिला कौशल का प्रमाण और सम्मान

न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर

मुंगेर जिला आज विकास और स्वावलंबन के एक नए अध्याय का साक्षी बना। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के तत्वावधान में, समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर की अध्यक्षता में 1756 निर्माण श्रमिकों को ‘प्रमाण-पत्र’ वितरित किए गए। यह क्षण केवल एक कागज के वितरण का नहीं, बल्कि मुंगेर के सैकड़ों परिवारों के आर्थिक उत्थान और ‘रिवर्स माइग्रेशन’ (घर वापसी) के सपने को साकार करने वाला था।

कौशल से खुलेगा समृद्धि का द्वार
जिलाधिकारी ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आर.पी.एल. (Prior Learning Recognition) प्रशिक्षण के माध्यम से इन श्रमिकों ने अपनी विधा में निपुणता हासिल की है। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री की सोच के अनुरूप, बिहार को आत्मनिर्भर बनाने में यह प्रशिक्षित श्रमिक अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि अब हमारे श्रमिकों को रोजगार की तलाश में अपनों से दूर दूसरे राज्यों में भटकने की जरूरत नहीं है। आपके पास हुनर है, प्रमाण-पत्र है और अब आप अपने ही राज्य में सम्मान के साथ स्वरोजगार कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकते हैं।
सकारात्मक बदलाव की लहर
कार्यक्रम में नगर आयुक्त शिवाक्षी दीक्षित, अपर समाहर्ता मनोज कुमार और श्रम अधीक्षक सत्यप्रकाश की गरिमामयी उपस्थिति ने श्रमिकों का उत्साहवर्धन किया। अधिकारियों ने साझा किया कि यह प्रशिक्षण न केवल श्रमिकों की कार्यक्षमता बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें बाजार में बेहतर मजदूरी और अवसर दिलाने में भी मदद करेगा।
प्रमुख बिंदु:
कुल लाभार्थी: 1756 निबंधित निर्माण श्रमिक।
लक्ष्य: स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और पलायन पर रोक।
प्रभाव: आर्थिक रूप से सक्षम और तकनीकी रूप से दक्ष कार्यबल।
यह कार्यक्रम मुंगेर के लिए एक शुभ संकेत है, जहाँ हुनर को सम्मान मिल रहा है और श्रमिक अब ‘मजदूर’ से ‘सक्षम उद्यमी’ बनने की राह पर अग्रसर हैं।

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