न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर / मालदा
भीषण ठंड और घने कोहरे के आगमन को देखते हुए पूर्वी रेलवे का मालदा डिवीजन हाई अलर्ट पर है। यात्रियों की सुरक्षा और निर्बाध परिचालन सुनिश्चित करने के लिए डीआरएम श्री मनीष कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एक व्यापक ‘विंटर एक्शन प्लान’ लागू किया गया है। तकनीक और मैनपावर के अनूठे मेल से इस बार कोहरे के बीच भी ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
तकनीक से बढ़ी रफ्तार:
अब 75 किमी/घंटा की गति मालदा डिवीजन ने इस बार अत्याधुनिक फॉग सेफ्टी डिवाइसेज पर भरोसा जताया है। पूरे डिवीजन में वर्तमान में 347 उपकरण सक्रिय हैं। इन उपकरणों की कार्यक्षमता की निगरानी एक समर्पित व्हाट्सएप-आधारित डिजिटल सिस्टम से की जा रही है। इन्हीं पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के कारण, कोहरे के दौरान ट्रेनों की अनुमत गति को 60 किमी/घंटा से बढ़ाकर 75 किमी/घंटा कर दिया गया है, जिससे देरी में कमी आएगी।
ग्राउंड जीरो पर सख्त निगरानी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सीधे मैदान में उतारा गया है:
रात्रिकालीन फुटप्लेट निरीक्षण: मालदा टाउन, भागलपुर, जमालपुर, साहिबगंज और किउल जैसे प्रमुख खंडों में अधिकारी इंजन में सवार होकर (फुटप्लेटिंग) रीयल-टाइम निगरानी कर रहे हैं।
जीपीएस ट्रैकिंग: ट्रैक मेंटेनर्स और कीमैन द्वारा की जा रही रात्रि गश्त की निगरानी मंडल मुख्यालय से सीधे जीपीएस के माध्यम से की जा रही है।
दृश्यता प्रोटोकॉल: यदि दृश्यता 180 मीटर से कम होती है, तो स्टेशन मास्टर तुरंत ‘डेटोनेटर’ (पटाखा सिग्नल) तैनात करने का निर्देश देते हैं ताकि लोको पायलट को श्रव्य चेतावनी मिल सके।
इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव
कोहरे में विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए इंजीनियरिंग विभाग ने युद्धस्तर पर काम किया है। सभी सिग्नल बोर्ड, सीटी बोर्ड और एलसी गेट्स पर चमकदार (रिट्रो-रिफ्लेक्टिव) पट्टियाँ लगाई गई हैं। साथ ही, ट्रेनों के पिछले हिस्से में लगने वाले टेल लैंप को हाई-विजिबिलिटी एलईडी फ्लैशर से बदल दिया गया है।
लोको पायलटों को विशेष निर्देश
लोको पायलटों को लेवल क्रॉसिंग पर अधिक बार सीटी बजाने और स्वचालित सिग्नलिंग क्षेत्रों में ‘सुरक्षित ब्रेकिंग दूरी’ बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कि मालदा डिवीजन का प्राथमिक लक्ष्य शून्य दुर्घटना और न्यूनतम देरी है। प्रतिकूल मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए रेलवे का यह सक्रिय और तकनीक-आधारित दृष्टिकोण यात्री सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।



