न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर
बिहार का ‘लौह नगरी’ और योग नगरी कहा जाने वाला मुंगेर अब अपराध के साये से बाहर निकलकर सुरक्षा और कानून के राज का नया अध्याय लिख रहा है। मुंगेर पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी 2025 के वार्षिक आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिले में अपराधियों के लिए अब कोई सुरक्षित कोना नहीं बचा है। पुलिस की आक्रामक रणनीति और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के कारण जिले में जघन्य अपराधों के आंकड़ों में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है।

अपराध का ग्राफ गिरा, पुलिस का इकबाल बुलंद
वर्ष 2024 की तुलना में 2025 मुंगेर के लिए शांति और सुरक्षा का साल रहा। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में हत्या की घटनाओं में 50% की कमी आई है (2024 में 62 से घटकर 2025 में 31)। वहीं, लूट की घटनाओं में 55% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जो पुलिस की मुस्तैद गश्ती का प्रमाण है। आर्म्स एक्ट और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

दोहरे हत्याकांड का आरोपी समीर सागर उर्फ पवन मंडल का फाइल फोटो
‘टॉप-10’ अपराधियों का सफाया और मिनी गन फैक्ट्री पर प्रहार
पुलिस ने इस वर्ष जिले के सबसे खूंखार टॉप-10 अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचाया है। इनमें समीर सागर उर्फ पवन मंडल, इंदल राय और श्रवण यादव जैसे नाम शामिल हैं, जिनका लंबा आपराधिक इतिहास रहा है।
मुंगेर की पुरानी पहचान ‘अवैध हथियारों’ के खिलाफ पुलिस ने निर्णायक जंग लड़ी है। वर्ष 2025 में 55 मिनी गन फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया गया और 204 अवैध आग्नेयास्त्र जब्त किए गए। इसके साथ ही 1968 कारतूसों की बरामदगी ने अपराधियों के सप्लाई चेन को तोड़ कर रख दिया है।

‘अभया ब्रिगेड’ और डायल 112: सुरक्षा का नया कवच
महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘अभया ब्रिगेड’ की स्थापना मुंगेर पुलिस का सबसे प्रभावी कदम साबित हुआ है। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के बाहर सादे लिबास और वर्दी में पुलिस की तैनाती से मनचलों में खौफ व्याप्त है।
आपातकालीन सेवा डायल 112 की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष कुल 30,536 शिकायतों का निपटारा किया गया। मुंगेर पुलिस का औसत रिस्पॉन्स टाइम मात्र 12 मिनट 47 सेकंड रहा, जो राज्य के बेहतर प्रदर्शनों में से एक है।

मुंगेर पुलिस के समक्ष नक्सलियों का आत्म समर्पण (फाइल फोटो)
नक्सलवाद पर अंतिम चोट और नशा मुक्ति अभियान
पुलिस ने न केवल शहरी अपराध, बल्कि नक्सलवाद पर भी कड़ा प्रहार किया। इस वर्ष 10 नक्सलियों (6 गिरफ्तारी, 4 आत्मसमर्पण) को मुख्यधारा से बाहर किया गया। शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करते हुए लगभग 30,000 लीटर देसी-विदेशी शराब नष्ट की गई और भारी मात्रा में गांजा व ब्राउन शुगर जब्त कर नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी गई।
निष्कर्ष
मुंगेर पुलिस के ये आंकड़े केवल संख्या नहीं, बल्कि आम जनता के बीच लौटा ‘भरोसा’ हैं। पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में चलाए गए इन अभियानों ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो अपराध मुक्त समाज का सपना हकीकत बन सकता है। मुंगेर अब अवैध हथियारों की मंडी नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ता जिला बन रहा है।



