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मुंगेर: जल-जीवन-हरियाली दिवस पर समीक्षा बैठक आयोजित, पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं में प्रगति पर बल

न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान के तहत मंगलवार को समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। उप विकास आयुक्त (DDC) अजीत कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले में संचालित विभिन्न पर्यावरणीय और जल संरक्षण योजनाओं की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

अभियान का मूल उद्देश्य: जल और हरियाली सुरक्षित करना
बैठक को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त ने कहा कि 2 अक्टूबर 2019 को शुरू की गई यह योजना राज्य के भूमिगत जल स्तर को बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने जोर दिया कि सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं का जीर्णोद्धार और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण सुनिश्चित करना ही इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है।
मुंगेर जिले की उपलब्धियों का विवरण
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, मुंगेर जिले ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है:
अतिक्रमण मुक्ति: चिन्हित 64 अतिक्रमित जल संरचनाओं में से 63 को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है।
जीर्णोद्धार: तालाब, आहर और पईन की कुल 1024 चिन्हित संरचनाओं में से 1001 का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। वहीं, 1503 सार्वजनिक कुओं में से 1038 का कायाकल्प किया गया है।
जल संचयन: सरकारी भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन (Water Harvesting) हेतु 160 भवनों में कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अतिरिक्त, चापाकलों और कुओं के किनारे 8,187 सोख्ता का निर्माण कराया गया है।
वृक्षारोपण एवं कृषि: पर्यावरण संतुलन हेतु मनरेगा और वन विभाग के सहयोग से जिले में अब तक लगभग 25 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। कृषि के क्षेत्र में 4239 एकड़ में जैविक खेती और 5787 एकड़ में ‘मौसम अनुकूल खेती’ को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सौर ऊर्जा: ऊर्जा संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 168 सरकारी भवनों पर सोलर प्लांट स्थापित किए गए हैं।

प्रशासनिक निर्देश
उप विकास आयुक्त ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि शेष बचे कार्यों को समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करें। उन्होंने जनसामान्य से भी अपील की कि वे जल संचयन और वृक्षारोपण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी और संबंधित तकनीकी कर्मी उपस्थित थे।

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