न्यूज अंग दस्तक | संग्रामपुर (मुंगेर)
क्या हमारी सड़कें अब श्मशान बन चुकी हैं? क्या भारी वाहनों के पहियों को मासूमों के खून का चस्का लग गया है? संग्रामपुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार को जो हुआ, उसने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि प्रशासन के दावों की भी धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। एक बेलगाम हायवा (Hyva) ने नौवीं कक्षा की छात्रा सपना कुमारी (14) को उस वक्त रौंद डाला, जब वह अपनी छोटी बहन के साथ सुनहरे भविष्य का सपना लिए परीक्षा देने जा रही थी।

मौत का तांडव और प्रशासन की सुस्ती
घटना तब हुई जब झिकुली गांव निवासी मुकेश यादव की पुत्री सपना अपनी बहन नैना के साथ साइकिल से एसबीआऱटी कन्या उच्च विद्यालय जा रही थी। स्टेट बैंक के समीप, विपरीत दिशा से आ रहे यमदूत रूपी तेज रफ़्तार हायवा ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि सपना की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। गनीमत रही कि उसकी छोटी बहन नैना बाल-बाल बच गई, लेकिन उसने जो मंजर देखा, वह उसे उम्र भर का जख्म दे गया।
आक्रोश की आग में जल उठा संग्रामपुर
बेटी की लाश सड़क पर देख परिजनों का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित स्थानीय लोगों और परिजनों ने न केवल उस हत्यारे वाहन के शीशे चकनाचूर कर दिए, बल्कि संग्रामपुर-गंगटा और सुल्तानगंज-देवघर मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग स्पष्ट और तल्ख है:
• दोषी चालक की अविलंब गिरफ्तारी हो।
• मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
• रिहायशी इलाकों में भारी वाहनों के परिचालन पर तुरंत रोक लगाई जाए।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
यह महज एक ‘हादसा’ नहीं है, यह व्यवस्था की विफलता है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ये भारी वाहन मौत की रफ़्तार से कैसे दौड़ रहे हैं? क्या प्रशासन किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? आज एक ‘सपना’ टूट गया है, कल किसी और की बारी हो सकती है। जब तक सड़कों पर इन ‘दहाड़ते हुए मोंस्टर्स’ पर लगाम नहीं कसी जाएगी, तब तक मासूमों की जान इसी तरह से जाते रहेगी।



