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मुंगेर: लिंग चयन पर प्रशासन सख्त, जिलाधिकारी ने अल्ट्रासाउंड संचालकों को दी ‘जीरो टॉलरेंस’ की चेतावनी

न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर

मुंगेर के जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले में कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध और अवैध लिंग परीक्षण के लिए कोई जगह नहीं है। समाहरणालय स्थित संग्रहालय सभागार में आयोजित ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत एक उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि प्रशासन इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति पर काम कर रहा है।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का आगाज
महिला एवं बाल विकास निगम के तत्वावधान में आयोजित इस ‘उन्नत प्रशिक्षण सत्र’ का शुभारंभ जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर, उप विकास आयुक्त अजीत कुमार सिंह, सिविल सर्जन डॉ. राजू और डीपीओ (ICDS) गुंजन मौली ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस सत्र में जिले के सभी प्रमुख अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालक और चिकित्सा विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

पीसीपीएनडीटी अधिनियम का अक्षरशः पालन अनिवार्य
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में ‘प्रसव पूर्व लिंग भेद परीक्षण निषेध अधिनियम (PCPNDT Act), 1994’ के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हर व्यक्ति की यह कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है कि वे समाज के लैंगिक संतुलन को बनाए रखें।

जिलाधिकारी के संबोधन के मुख्य बिंदु:
सख्त कार्रवाई की चेतावनी: यदि कोई भी केंद्र संचालक प्रसव पूर्व लिंग चयन या परीक्षण में संलिप्त पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
भविष्य की चिंता: लिंग परीक्षण के कारण उत्पन्न हो रहा लैंगिक असंतुलन भविष्य के समाज के लिए एक गंभीर संकट है। इसे रोकने के लिए ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना होगा।
नियमित निगरानी: प्रशासन द्वारा समय-समय पर अल्ट्रासाउंड केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। किसी भी स्तर पर रिकॉर्ड संधारण में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विशेषज्ञों ने दी कानूनी बारीकियों की जानकारी
प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने संचालकों को कानून की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। सत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई:
पंजीकरण नियमावली: केंद्रों के पंजीकरण और नवीनीकरण की सही प्रक्रिया।
अनिवार्य अभिलेख (Records): फॉर्म ‘एफ’ सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों को सही ढंग से भरने और सुरक्षित रखने के तरीके।
दंडात्मक प्रावधान: कानून का उल्लंघन करने पर होने वाली जेल और जुर्माने की विस्तृत जानकारी।
निरीक्षण प्रक्रिया: जांच दल के दौरे के समय बरती जाने वाली सावधानियां और पारदर्शिता।

संवाद से शंकाओं का समाधान
कार्यक्रम के अंतिम चरण में जिलाधिकारी और विशेषज्ञों ने अल्ट्रासाउंड संचालकों के साथ सीधा संवाद किया। संचालकों द्वारा पूछे गए तकनीकी और व्यावहारिक सवालों का समाधान किया गया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ईमानदार संचालकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नियमों के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त और सिविल सर्जन ने भी चिकित्सा नैतिकता पर प्रकाश डालते हुए सभी से एक स्वस्थ और संतुलित समाज के निर्माण में सहयोग की अपील की।

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