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सवर्ण आयोग की बैठक में गूँजा EWS का मुद्दा, आयु सीमा में छूट और छात्रवृत्ति के लिए मिले महत्वपूर्ण सुझाव

न्यूज अंग दस्तक| मुंगेर
बिहार राज्य उच्च जाति आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचन्द्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को मुंगेर प्रमंडल मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उच्च जातियों (सवर्णों) की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों (EWS) के सशक्तिकरण के लिए भविष्य की कार्य योजना तैयार करना था। बैठक में प्रमंडल के विभिन्न जिलों के वरिष्ठ अधिकारी, बुद्धिजीवी, समाजसेवी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

EWS प्रमाणपत्र की समस्याओं पर कड़ा रुख
बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि पात्र व्यक्तियों को EWS प्रमाणपत्र बनवाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, जिलाधिकारियों ने दावा किया कि आवेदनों का समय पर निष्पादन किया जा रहा है, लेकिन आधार प्रमाणीकरण और वंशावली जैसे दस्तावेजों की कमी के कारण कई मामले लंबित हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि नियमानुसार कार्रवाई कर इन लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करें।

सुझावों का पिटारा: 3 साल की वैधता और उम्र सीमा में छूट
बैठक में उपस्थित बुद्धिजीवियों और प्रतिनिधियों ने सवर्ण वर्ग के उत्थान के लिए कई क्रांतिकारी सुझाव दिए, जिन्हें आयोग ने सूचीबद्ध किया है:
वैधता विस्तार: वर्तमान में EWS प्रमाणपत्र की वैधता केवल एक वर्ष है, जिसे बढ़ाकर 3 वर्ष करने का सुझाव दिया गया।
आयु सीमा में रियायत: राज्य सरकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में सवर्ण अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम उम्र सीमा पुरुषों के लिए 40 वर्ष और महिलाओं के लिए 45 वर्ष करने की मांग उठी।
शिक्षा और छात्रवृत्ति: केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों में EWS बच्चों के लिए सीटें आरक्षित करने का सुझाव दिया गया। साथ ही, BPSC की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले सवर्ण अभ्यर्थियों को भी अन्य वर्गों की तरह ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि और प्री-मैट्रिक/पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति देने की बात कही गई।
आवास सुविधा: हर जिले में अन्य आरक्षित वर्गों की तर्ज पर EWS अभ्यर्थियों के लिए भी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव प्राप्त हुआ।

सरलीकरण पर जोर
बैठक में यह विशेष सुझाव भी आया कि दस्तावेजों की कमी के कारण आवेदन सीधे निरस्त न किए जाएं। इसके बजाय, मोबाइल संदेश के माध्यम से आवेदक को सूचित किया जाए और एक निश्चित समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया जाए। इसके अतिरिक्त, प्रमंडलीय आयुक्त को स्वयं अस्वीकृत प्रमाणपत्रों की समीक्षा करने का सुझाव भी दिया गया है।

अध्यक्ष का आश्वासन
डॉ. महाचन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि राज्य सरकार उच्च जातियों के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्राप्त सुझावों की गहन समीक्षा की जाएगी और इन्हें सरकार के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
बैठक के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यवाही समाप्त की गई। इस अवसर पर उप सचिव शैलेन्द्र झा समेत कई गणमान्य अधिकारी उपस्थित थे।

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