न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर
न्याय के मंदिर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। स्थानीय विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) सह ए.डी.जे.-6 की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त निलेश कुमार उर्फ संस्कार शर्मा को मुफसिल थाना कांड संख्या-172/24 (पॉक्सो वाद संख्या-18/24) के आरोपों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है। अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को साबित करने में विफल रहने पर न्यायालय ने अभियुक्त को रिहा करने का आदेश दिया।
अभियोजन के दावों की खुली पोल
इस चर्चित मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल पाँच गवाहों को कटघरे में पेश किया गया था। विशेष लोक अभियोजक प्रीतम कुमार वैश्य ने सरकार की ओर से दलीलें पेश कीं, लेकिन बचाव पक्ष की तीखी जिरह और पुख्ता सबूतों के आगे अभियोजन की कहानी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।
अधिवक्ता अनिल भूषण की धारदार बहस
बचाव पक्ष की कमान जिले के वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार भूषण ने संभाली। उन्होंने न केवल अभियोजन के गवाहों से मनोवैज्ञानिक और तथ्यात्मक जिरह की, बल्कि अपनी अंतिम बहस में कानूनी बारीकियों को रखते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि निलेश कुमार को इस मामले में गलत तरीके से घसीटा गया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने माना कि अभियुक्त के खिलाफ साक्ष्य अपर्याप्त हैं और उसे दोषमुक्त घोषित किया।
न्यायिक व्यवस्था पर अटूट विश्वास
फैसले के बाद प्रसन्नता व्यक्त करते हुए वरीय अधिवक्ता अनिल भूषण ने कहा, “यह केवल एक व्यक्ति की रिहाई नहीं, बल्कि सत्य की विजय है। माननीय न्यायालय के इस न्यायपूर्ण निर्णय ने साबित कर दिया है कि हमारी न्यायिक व्यवस्था निर्दोषों के लिए एक सुरक्षा कवच है।” उन्होंने इस निर्णय पर गहरा संतोष व्यक्त करते हुए न्यायालय के प्रति आभार प्रकट किया। इस फैसले के बाद अधिवक्ता संघ, मुंगेर और अभियुक्त के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।



