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धर्म और राष्ट्र रक्षा के अमर प्रतीक: सरस्वती विद्या मंदिर में श्रद्धापूर्वक मनाया गया ‘वीर बाल दिवस’

न्यूज अंग दस्तक| मुंगेर
स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर के प्रांगण में आज ‘वीर बाल बलिदानी दिवस’ का गरिमामय आयोजन किया गया। यह दिवस दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों के उस अद्वितीय और महान बलिदान को समर्पित था, जिन्होंने अल्पायु में ही धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। विद्यालय परिवार ने इस अवसर पर साहिबज़ादों की वीरता को नमन करते हुए नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से अवगत कराया।

कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ
समारोह का विधिवत शुभारंभ प्रधानाचार्य संजय कुमार सिंह, उपप्रधानाचार्य अमन कुमार सिंह, बालिका खंड की प्रभारी प्रधानाचार्या राखी कुमारी एवं प्राथमिक खंड की प्रभारी प्रधानाचार्या सुजीता कुमारी ने संयुक्त रूप से किया। अतिथियों ने वीर बालकों के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। पूरा वातावरण ‘वीर साहिबज़ादे अमर रहें’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

वक्ताओं के विचार: बलिदान की अनूठी गाथा
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य संजय कुमार सिंह ने कहा, “साहिबज़ादों का बलिदान मानवता के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उन्होंने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। इतनी कम उम्र में अत्याचार के सामने न झुकने का उनका संकल्प हमें आत्मसम्मान के साथ जीने की प्रेरणा देता है।”
वहीं, उपप्रधानाचार्य अमन कुमार सिंह ने उनके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल अवस्था में धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान के लिए सर्वोच्च बलिदान देने के उदाहरण विश्व इतिहास में विरले ही मिलते हैं। यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा। बालिका खंड की प्रभारी राखी कुमारी ने भी साहिबज़ादों के त्याग को अटूट शक्ति का स्रोत बताया।
एकता और अखंडता का संकल्प
कार्यक्रम के अंतिम चरण में विद्यालय के समस्त शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने एक स्वर में राष्ट्र की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर वीरता, साहस और नैतिक मूल्यों का संचार करना था, ताकि वे अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ सकें।

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