न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर
जिले के लिए सड़क सुरक्षा सप्ताह का पहला ही दिन अमंगल साबित हुआ। एक ओर जहां प्रशासन ‘सड़क सुरक्षा सप्ताह’ मनाकर लोगों को नियमों का पाठ पढ़ाने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बेलगाम रफ्तार ने तीन घरों में मातमी सन्नाटा पसार दिया है। ऐसा लगता है कि मुंगेर की सड़कों पर नियम नहीं, बल्कि ‘यमराज’ दौड़ रहे हें। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई तीन भीषण दुर्घटनाओं ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।
घटना 1: हवेली खड़गपुर में अज्ञात वाहन का ‘हिट एंड रन’
पहली घटना हवेली खड़गपुर थाना क्षेत्र के राजरानी तालाब के पास की है। यहाँ एक बाइक पर सवार महिला को पीछे से आ रहे एक अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि महिला सड़क पर दूर जा गिरी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। चश्मदीदों के मुताबिक, अज्ञात वाहन की रफ्तार इतनी तेज थी कि ड्राइवर ने टक्कर मारने के बाद रुकने की जहमत तक नहीं उठाई और रफूचक्कर हो गया। पुलिस अब आसपास के CCTV फुटेज खंगाल रही है, लेकिन “हिट एंड रन” के ऐसे मामले पुलिसिया गश्त पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
घटना 2: बरियारपुर में सुबह की सैर बनी आखिरी यात्रा
दूसरी हृदयविदारक घटना बरियारपुर थाना क्षेत्र के नया छावनी के पास हुई। 65 वर्षीय बुजुर्ग रामवृक्ष शर्मा हर रोज की तरह सड़क किनारे टहल रहे थे। उन्हें क्या पता था कि सामने से आ रही एक अनियंत्रित कार उनकी जान ले लेगी। तेज रफ्तार कार ने बुजुर्ग को सीधी टक्कर मारी। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक बुजुर्ग, जो सड़क के किनारे (सुरक्षित स्थान) चल रहा था, वह भी सुरक्षित नहीं है—यह मुंगेर की बदहाल यातायात व्यवस्था की हकीकत है।
घटना 3: पिता को जेल से छुड़ाने आया था बेटा, खुद दुनिया छोड़ गया
सबसे दर्दनाक खबर मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के बोचाही से आई। यहाँ हरिओम नामक युवक अपनी बाइक से वकील से मिलने जा रहा था। उसके पिता जेल में बंद हैं और वह उनकी जमानत की अर्जी दाखिल करने के लिए कानूनी सलाह लेने निकला था। लेकिन बोचाही के पास एक तेज रफ्तार कार ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। गंभीर रूप से घायल हरिओम ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जो बेटा अपने पिता की आजादी की उम्मीद लेकर घर से निकला था, उसकी अर्थी अब उसके पिता के सामने होगी। यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार के भविष्य का कत्ल है।
आखिर क्यों ‘कब्रगाह’ बन रही हैं मुंगेर की सड़कें?
इन तीनों घटनाओं का विश्लेषण करें तो कुछ कड़वे सच सामने आते हैं। सड़क सुरक्षा सप्ताह का दिखावा: विडंबना देखिए कि आज से ही ‘सड़क सुरक्षा सप्ताह’ शुरू हुआ है। कागज पर जागरूकता की बातें हो रही हैं, लेकिन धरातल पर न तो तेज रफ्तार पर लगाम है और न ही भारी वाहनों की चेकिंग।
अनियंत्रित रफ्तार और शराब का शक:
अक्सर देखा गया है कि कोहरे के इस मौसम में ड्राइवर या तो नशे की हालत में होते हैं या समय बचाने के चक्कर में ओवरस्पीडिंग करते हैं। इन तीनों मामलों में ‘रफ्तार’ ही कातिल बनी है।
NH और स्टेट हाईवे पर सुरक्षा का अभाव
राजरानी तालाब और बोचाही जैसे इलाकों में सड़कों पर ‘स्पीड ब्रेकर’ या ‘सावधानी बोर्ड’ की कमी है। पुलिस बल की तैनाती केवल वीआईपी मूवमेंट तक सीमित रहती है, आम आदमी भगवान भरोसे है। मुंगेर में आज जो तीन मौतें हुई हैं, वे केवल आंकड़े नहीं हैं। ये प्रशासन की विफलता और ड्राइवरों की संवेदनहीनता का नतीजा हैं। यदि जल्द ही भारी वाहनों की गति सीमा तय नहीं की गई और अवैध ड्राइविंग पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ‘सड़क सुरक्षा सप्ताह’ महज एक सरकारी रस्म अदायगी बनकर रह जाएगा।



