न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर
केंद्रीय बजट 2026 ने बिहार के ऐतिहासिक रेल शहर जमालपुर और मुंगेर जिले के लिए उम्मीदों और चुनौतियों का एक मिला-जुला पिटारा खोला है। जहाँ एक ओर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भारी-भरकम निवेश की घोषणा हुई है, वहीं दूसरी ओर इसे एक बड़ा ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने की पुरानी मांग को लेकर स्थानीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखी गई है।
जमालपुर रेल कारखाना: आधुनिकता और क्षमता विस्तार
एशिया के सबसे पुराने रेल कारखानों में से एक, जमालपुर कारखाने के लिए 350 करोड़ रुपये के कायाकल्प प्लान को बजट में गति दी गई है। कारखाने की क्षमता को 545 से बढ़ाकर 800 यूनिट प्रति माह करने के लिए 78.96 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह निवेश न केवल कारखाने की उत्पादकता बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में रोजगार के अवसरों को भी सृजित करेगा। जमालपुर स्थित ‘इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग’ को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। सबसे बड़ी घोषणा यह है कि 2026 सत्र से इसे आम छात्रों के लिए भी खोल दिया जाएगा, जिससे यह एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र बनेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर: नई लाइनें और दोहरीकरण का जाल
मुंगेर की रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। 14 किमी लंबी इस लाइन के दोहरीकरण के लिए 1,890 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट रखा गया है, जिसमें गंगा नदी पर एक नया रेल पुल भी शामिल है। वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पटना के रास्ते गुजरेगा, जो मुंगेर और आसपास के क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। जमालपुर जंक्शन पर प्लेटफॉर्म संख्या 5 और 6 के निर्माण को 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जिससे ट्रेनों के परिचालन में सुगमता आएगी।
सुल्तानगंज-देवघर परियोजना: श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सौगात
श्रावणी मेले और स्थानीय यात्रियों के लिए बहुप्रतीक्षित सुल्तानगंज-देवघर (भाया कटोरिया) लाइन को “अनफ्रीज” करना इस बजट का सबसे बड़ा आकर्षण रहा। इस 75 किमी लंबी नई लाइन के बनने से सुल्तानगंज और देवघर के बीच की रेल दूरी 160 किमी से घटकर मात्र 104 किमी रह जाएगी। 1,261 करोड़ की इस परियोजना के लिए 2.90 करोड़ का टेंडर सर्वे और DPR के लिए जारी हो चुका है।



