न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर/पटना
बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक ऐसी बड़ी मछली को जाल में फंसाया है, जिसके तार न केवल बिहार, बल्कि उत्तर प्रदेश और झारखंड के अंडरवर्ल्ड से भी जुड़े हैं। पटना एसटीएफ की इस सर्जिकल स्ट्राइक ने सत्ता और अपराध के उस गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है, जो ‘मुखिया पति’ की आड़ में एके-47 जैसे घातक हथियारों की मंडी चला रहा था।

लाल घेरे में मिर्जापुर बरदह पंचायत की मुखिया गुलनाज शाहीन का पति मो. फिरोज आलम उर्फ फजिया (फाइल फोटो)
STF का ‘मिशन पटना’: गुपचुप घेराबंदी और खात्मा
गुप्त सूचना के आधार पर पटना एसटीएफ के डीएसपी शेख साबिर और अबू सैफी मुर्तजा की टीम ने एक हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन को अंजाम दिया। मिर्जापुर बरदह पंचायत की मुखिया गुलनाज शाहीन का पति, मोहम्मद फिरोज आलम उर्फ फजिया, जो लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था, आखिरकार पटना के पास से दबोच लिया गया। फजिया केवल एक अपराधी नहीं, बल्कि हथियारों की तस्करी का एक ऐसा ‘सिंडिकेट’ चला रहा था जिसने तीन राज्यों की पुलिस की नींद उड़ा रखी थी।
पंचायत भवन से चलता था ‘आतंक का साम्राज्य’
हैरानी की बात यह है कि आरोपी फिरोज आलम अपनी पत्नी के मुखिया होने का फायदा उठाकर ‘मुखिया प्रतिनिधि’ के तौर पर काम करता था। जनसेवा के नाम पर वह पुलिस और प्रशासन के लिए एक कवच तैयार किए हुए था, जबकि पर्दे के पीछे वह AK-47 और कार्बाइन जैसे विध्वंसक हथियारों की सप्लाई चेन का मास्टरमाइंड था।
अपराधों की लंबी फेहरिस्त: बिहार से यूपी तक फैला जाल
फिरोज आलम का क्रिमिनल रिकॉर्ड किसी पेशेवर गैंगस्टर से कम नहीं है:
हथियार तस्करी: जमालपुर और मुफस्सिल थाने में इस पर एके-47 और कार्बाइन की तस्करी के कई संगीन मामले दर्ज हैं।
झारखंड कनेक्शन: धनबाद में भी हथियारों की बड़ी खेप पहुंचाने के मामले में यह वांछित था।
यूपी में गिरफ्तारी: साल 2011 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (चौरी थाना) में इसे पिस्तौल के साथ गिरफ्तार किया गया था।
स्थानीय आतंक: गाड़ी चोरी, मारपीट और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामले इसके नाम की दहशत की गवाही देते हैं।
बरदह: फिर से बना ‘कलंक’ का केंद्र
मिर्जापुर बरदह गांव एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन गलत वजहों से। पूर्व में भी इस गांव से एके-47 की तस्करी के तार जुड़े रहे हैं, जिससे पूरे इलाके की छवि खराब हुई है। फिरोज आलम की गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि अपराध की जड़ें कितनी गहरी हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किन बड़ी वारदातों या नक्सली गतिविधियों के लिए किया जाना था।
निष्कर्ष: एसटीएफ की इस कार्रवाई ने अपराधियों को साफ संदेश दिया है—चाहे आप किसी भी पद की ओट में छिप जाएं, कानून के हाथ आपके गिरेबान तक पहुंच ही जाएंगे। फजिया की गिरफ्तारी से हथियारों की सप्लाई लाइन पर एक करारी चोट लगी है।



