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सावधान! अपनों के भेष में घूम रहे हैं ‘आस्तीन के सांप’: भरोसे की बलि चढ़े 32.50 लाख रुपये

न्यूज अंग दस्तक | तारापुर (मुंगेर)

आज के दौर में दुश्मन बाहर नहीं, बल्कि आपके घर की दहलीज के भीतर, आपके साथ बैठकर चाय पी रहे हैं। मुंगेर के तारापुर थाना क्षेत्र के नवादा गाँव में जो हुआ, वह केवल एक चोरी नहीं, बल्कि भरोसे की निर्मम हत्या है। एक देवर ने अपनी ही सगी भाभी के तीन अलग-अलग बैंक खातों से 32 लाख 50 हजार रुपये पार कर दिए। यह घटना उन सभी के लिए एक कड़ा सबक है जो ‘घर का सदस्य है’ समझकर अपनी डिजिटल सुरक्षा और बैंक की जानकारी दूसरों के हाथ में सौंप देते हैं।


धोखे का डिजिटल जाल

पीड़िता गुड़िया देवी के पति संतोष सिंह दुबई में मेहनत की कमाई कर रहे थे, और उनके भाई ने अपनी जमीन बेचकर ₹10 लाख से ज्यादा की राशि अपनी बहन के पास सुरक्षित रखने के लिए दी थी। लेकिन उन्हें क्या पता था कि घर में ही बैठा राहुल कुमार उनकी मेहनत की कमाई पर गिद्ध की तरह नजरें गड़ाए बैठा है।

राहुल ने चालाकी की सारी हदें पार कर दीं। उसने भाभी के मोबाइल नंबर और आधार कार्ड का इस्तेमाल कर खुद ही ‘फोन पे’ और ‘गूगल पे’ अकाउंट बना लिए। बैंक जाने और फिंगरप्रिंट न मिलने का बहाना बनाकर वह अपनी भाभी का अंगूठा लगवाता रहा और धीरे-धीरे खाते खाली कर दिए। जब भाभी बैंक पहुँचीं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई—लाखों के बैलेंस वाले खाते में महज 200 रुपये बचे थे।

समाज के लिए 4 कड़े सबक: भूलकर भी न करें ये गलतियां

यह घटना केवल एक परिवार की बर्बादी नहीं है, बल्कि हमारे समाज की उन खामियों को उजागर करती है जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं:

  1. डिजिटल साक्षरता अब विलासिता नहीं, जरूरत है: अगर आपको मोबाइल बैंकिंग, UPI या ATM चलाना नहीं आता, तो इसे दूसरों (चाहे वो भाई या देवर ही क्यों न हों) के भरोसे छोड़ने के बजाय खुद सीखें। आपकी अज्ञानता ही अपराधी का सबसे बड़ा हथियार है।
  2. कागजी कार्रवाई और फिंगरप्रिंट की पवित्रता: कभी भी किसी भी दस्तावेज या मशीन पर बिना पूरी जानकारी के अंगूठा न लगाएं। अपराधी ‘सर्वर डाउन’ या ‘फिंगरप्रिंट मैच न होने’ का बहाना बनाकर आपसे बार-बार मशीन पर अंगूठा लगवा सकते हैं।
  3. पैसे के मामले में ‘अंधा भरोसा’ आत्मघाती है: खून के रिश्तों में प्यार होना चाहिए, लेकिन वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और निगरानी अनिवार्य है। अपने बैंक के मैसेज नियमित रूप से चेक करें या किसी विश्वसनीय जानकार से करवाएं।
  4. ATM और पासबुक अपनी कस्टडी में रखें: पीड़िता ने अपनी पासबुक और ATM कार्ड देवर को सौंप रखे थे। याद रखें, आपका पासबुक और ATM आपकी तिजोरी की चाबी है, इसे कभी भी किसी को न दें।

निष्कर्ष

आरोपी राहुल फिलहाल फरार है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है। लेकिन इस घटना ने जो घाव गुड़िया देवी के परिवार को दिए हैं, उसकी भरपाई मुश्किल है। समाज को यह समझना होगा कि सावधानी ही सुरक्षा है। अगर आप आज जागरूक नहीं हुए, तो कल कोई और ‘राहुल’ किसी और घर की जमा-पूंजी और खुशियां लेकर फरार हो जाएगा।

जागिए! इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।

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