न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर
इतिहास के पन्नों में दर्ज 1934 का वो विनाशकारी भूकंप, जिसने मुंगेर की धरती को झकझोर कर रख दिया था, आज भी लोगों की स्मृतियों में सेवा और संकल्प बनकर जीवित है। इसी पावन संकल्प की निरंतरता में आज शहर के विजय चौक, बेकापुर में ‘नारायण भोज’ का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक भोजन वितरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि मुंगेर की रक्षा और मानवता की सेवा का एक अभेद्य ‘रक्षा कवच’ है।
श्रद्धा और सेवा का संगम
कार्यक्रम में माननीय विधायक कुमार प्रणय, मेयर कुमकुम देवी, डिप्टी मेयर खालिद हुसैन और ट्रैफिक डीएसपी प्रभात रंजन सहित शहर के गणमान्य नागरिकों—अमरनाथ केसरी, शुभंकर झा, निर्मल जैन और राजेश कुमार—ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन सभी अतिथियों और स्थानीय युवाओं ने अत्यंत मर्यादा और सम्मान के साथ अपने हाथों से ‘नारायण’ (जरूरतमंदों) को भोजन परोसा। सेवा की इस भावना ने पूरे वातावरण को आत्मीयता से भर दिया।
आपदा की राख से उपजी परंपरा
उल्लेखनीय है कि इस परंपरा की नींव वर्ष 1935 में रखी गई थी। 1934 के भीषण भूकंप में जान गंवाने वाली आत्माओं की शांति और भविष्य में ऐसी किसी भी त्रासदी से शहर को सुरक्षित रखने की प्रार्थना के साथ यह आयोजन शुरू हुआ था। पिछले 91 वर्षों से मुंगेरवासी इस अटूट विश्वास को संजोए हुए हैं कि ईश्वर उनकी इस सामूहिक प्रार्थना को स्वीकार करते हैं।
शहर का ‘रक्षा कवच’
मान्यता है कि 1934 के बाद कई बार धरती डोलने के बावजूद मुंगेर ने वैसी भयावहता फिर कभी नहीं देखी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह नारायण सेवा और सामूहिक संकल्प ही है, जो शहर पर आने वाली विपदाओं को टाल देता है।
यह आयोजन आज भी संदेश देता है कि आपदा के बाद उपजी करुणा और एकजुटता ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। पीढ़ियों से चली आ रही यह जीवंत परंपरा न केवल मुंगेर की विरासत है, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए सेवा और कृतज्ञता का एक अनुपम पाठ भी है।



