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बिहार पुलिस का महा-प्रहार: खाकी के खौफ से घुटने पर नक्सलवाद, 6 लाख के इनामी कमांडरों समेत तीन खूंखार नक्सलियों का ‘सरेंडर’

न्यूज अंग दस्तक | मुंगेर

बिहार में लाल आतंक की कमर तोड़ने की दिशा में सुरक्षाबलों को आज एक ऐतिहासिक और निर्णायक सफलता हाथ लगी है। बिहार एसटीएफ (STF), जिला पुलिस और अन्य केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के बढ़ते दबाव और निरंतर जारी ऑपरेशनों के कारण मौत का पर्याय बन चुके तीन कुख्यात नक्सलियों ने पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार के समक्ष हथियार डाल दिए। आत्मसमर्पण करने वालों में तीन-तीन लाख रुपये के दो इनामी जोनल और सब-जोनल कमांडर शामिल हैं।

आत्मसमर्पण करते नक्सली नारायण कोड़ा

कुख्यातों का खात्मा, कानून की जीत
पुलिस मुख्यालय में आयोजित इस आत्मसमर्पण कार्यक्रम में नक्सलियों ने न केवल अपने अपराध स्वीकार किए, बल्कि भविष्य में हिंसा का रास्ता छोड़ने की शपथ भी ली। सरेंडर करने वाले मुख्य नक्सलियों का विवरण इस प्रकार है:
नारायण कोड़ा (जोनल कमांडर, CPI Maoist): मुंगेर का रहने वाला यह नक्सली पिछले 15 वर्षों से फरार था। इस पर बिहार सरकार ने 3 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
बहादुर कोड़ा (सब-जोनल कमांडर): इस पर भी 3 लाख रुपये का इनाम था। यह भी लंबे समय से सुरक्षाबलों की हिट लिस्ट में था।
बिनोद कोड़ा उर्फ बिनो कोड़ा: लखीसराय निवासी यह नक्सली भी कई जघन्य वारदातों में शामिल रहा है।

आत्मसमर्पण करते बहादुर कोड़ा

इनके हाथों रंगे थे बेगुनाहों के खून
ये नक्सली केवल संगठन के नेता नहीं थे, बल्कि खूंखार अपराधी थे। नारायण और बहादुर कोड़ा के खिलाफ लखीसराय, जमुई और मुंगेर जिलों में 23 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। इनके काले कारनामों की सूची लंबी है:
वर्ष 2020 में लखीसराय के श्रृंगीऋषि मंदिर के पुजारी की फिरौती न मिलने पर हत्या।
जमुई में SSB जवान सिकंदर यादव की घर में घुसकर हत्या।
वर्ष 2020 में मुंगेर में दो ग्रामीणों (अरुण राय और बृजलाल टुडू) का गला रेतकर नृशंस कत्ल।
जदयू नेता और मुखिया के परिजनों का सामूहिक अपहरण।
भारी मात्रा में हथियारों का जखीरा बरामद
नक्सलियों के साथ-साथ पुलिस ने भारी मात्रा में ‘वार-मैटेरियल’ भी बरामद किया है, जो किसी बड़ी साजिश को नाकाम करने जैसा है:
02 इंसास राइफल (5.56 mm)
04 एसएलआर राइफल (7.62 mm)
503 जिंदा कारतूस (विभिन्न बोर के)
10 वॉकी-टॉकी और 09 चार्जर

नक्सली को सम्मानित करते पुलिस अधिकारी

ऑपरेशन ‘क्लीन स्वीप’ का असर
बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह सफलता बिहार पुलिस की बदली हुई रणनीति का परिणाम है। एक ओर जहाँ एसटीएफ दुर्गम पहाड़ियों और जंगलों में नक्सलियों को चारों तरफ से घेर रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की “आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास” नीति नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का मौका दे रही है।
पुलिस महानिदेशक ने साफ संदेश दिया है कि जो नक्सली हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ेंगे, उनका अंत निश्चित है। नारायण और बहादुर कोड़ा जैसे दुर्दांत अपराधियों का झुकना यह साबित करता है कि अब बिहार की धरती पर अराजकता के दिन गिनती के बचे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों को अब सरकार की पुनर्वास योजना के तहत लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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